मुंबई के सुपरकॉप कहे जाने वाले हिनाशु रॉय ने गोली मार कर की खुदख़ुशी

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मुंबई:- मुंबई के सुपरकॉप कहे जाने वाले महाराष्ट्र के पूर्व एटीएस प्रमुख हिमांशु रॉय ने शुक्रवार को खुद की सर्विस रिवाल्वर से गोली मर कर खुदखुशी कर ली | 55 साल के रॉय लंबे वक्त से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। उनकी नियमित रूप से कीमोथैरेपी और रेडियशन थैरेपी चल रही थी। हालांकि अपनी फिटनेस का वह काफी ध्यान रखते थे। एटीएस हिमांशु रॉय एक बहादुर और सख्त उसूलों वाले अफसर थे। शुक्रवार सुबह उन्होंने अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। उन्होंने आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों के साथ आईपीएल फिक्सिंग और सट्टेबाजी, जेडे मर्डर, दाऊद की संपत्ति को जब्त करने से जुड़े केस की जांच की थी।
घायल हिमांशु रॉय को लेकर परिजन फौरन बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे| लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया| जानकारी के मुताबिक, हिमांशु रॉय ने मुंह में रखकर गोली मारी थी, जिसके चलते उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो गया था|

कब की खुदकुशी?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिमांशु रॉय ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से दिन में करीब 1 बजकर 40 मिनट पर खुद को गोली मारी है। घटना के वक्त घर में उनके अलावा उनकी पत्नी थी। उन्हें फौरन बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। यह जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस के कई अफसर फौरन अस्पताल पहुंच गए।

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कौन थे हिमांशु रॉय

1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु रॉय का नाम 2013 में स्पॉट फिक्सिंग मामले में विंदु दारा सिंह की गिरफ्तारी, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर के ड्राइवर आरिफ के एनकाउंटर, पत्रकार जेडे हत्या प्रकरण, विजय पालांडे-लैला खान डबल मर्डर केस जैसे अहम मामलों से जुड़ा रहा| अंडरवर्ल्ड कवर करने वाले पत्रकार जे डे की हत्या की गुत्थी सुलझाने में हिमांशु रॉय ने अहम भूमिका निभाई थी|

मिली थी z+ सुरक्षा

हिमांशु रॉय देश के उन कुछ चुनिंदा अफसरों में थे, जिन्हें z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी| हिमांशु को यह सुरक्षा मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस और इंडियन मुजाहिदीन के चीफ यासीन भटकल और दाऊद इब्राहिम की संपत्तियों को जब्त करने के चलते मिली हुई| आतंकवाद से जुड़े इन मामलो की जांच के दौरान हिमांशु की जान को खतरा माना गया था|

1988 बैच के आईपीएस अफसर थे
हिमांशु का जन्म 23 जून 1963 को हुआ था। वे 1988 बैच के आईपीएस अफसर थे। वे महाराष्ट्र पुलिस में एडीजी (एस्टेबलिशमेंट) के पद पर थे। वे महाराष्ट्र एटीएस के चीफ भी रहे।