‘ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ‘ अभियान का अब दिखने लगा असर


शिखा गौड़ डेस्क रीडर टाइम्स न्यूज़

बेटियों का जीवन बचाने और जीवन स्तर उठाने के लिए मोदी सरकार द्वारा शुरू किये गए ‘ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ‘ अभियान का असर अब दिखने लगा हैं। और पिछले साल में लिगानुपात सुधार आया हैं। लिगानुपात में स्थिति खराब होने वाले हरियाणा , चंडीगढ़ ,पंजाब ,यूपी , हिमाचल प्रदेश में सुधार आया हैं। हालांकि वही दूसरी ओर बिहार , कर्नाटक , केरल ,ओडिशा , नगालैंड। त्रिपुरा , दादर नगर हवेली ओर लक्ष्यद्वीप में लिगानुपात गिरा हैं। और स्थिति पहले से कही ज्यादा खराब हुई हैं। और इसके अलावा बाकि राज्यों में बालिकाओं की संख्या में सुधार आया हैं। झारखंड और मिजोरम में स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी छह साल पहले थी। झारखंड में प्रति 1,000 बालकों पर बालिकाओं की संख्या 920 और मिजोरम में 971 है।

बालकों की तुलना में बालिकाओं की घटती संख्या से देश की सरकारें चितित तो बहुत पहले थीं और इस दिशा में कदम भी उठाए जा रहे थे। लेकिन मोदी सरकार द्वारा चलाया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी प़़ढाओ’ अभियान इस दिशा में सबसे कारगर साबित हुआ। बेटियों के प्रति भेदभाव और उनके जन्म को कमतर आंकने वाले समाज की नकारात्मक सोच पिछले छह वषर्षो में कितनी बदली है, इसका सीधा उदाहरण सुधरता लिगानुपात है। महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा गुरवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में दिए गए ब्योरे में सुखद तस्वीर सामने आती है।