शादी से पहले जाने लडकी की कुछ बाते

शास्त्रों में 16 संस्कार का जिक्र किया गया है जिनमें एक संस्कार विवाह है जिसे शास्त्रों में काफी महत्व दिया गया है क्योंकि इस संस्कार से दो परिवार, दो व्यक्ति और आत्माओं का मिलन होता है और यह समाज के निर्माण में सहायक होता है।

इसलिए विवाह को लेकर शास्त्रों में कई नियम नीतियों का जिक्र किया गया है। महाराजनीतिज्ञ चाण्क्य ने भी विवाह को लेकर कई बातें कही है और महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इनका उल्लेख किया गया जिसमें समझाया गया है कि व्यक्ति को विवाह से पहले किन-किन बातों को जान लेना चाहिए।

विष्णु पुराण में बताया गया है कटु और कर्कश वाणी वाली कन्या जिस परिवार में विवाह करके आती है उस परिवार में अशांति का माहौल बना रहता है। मीठा और मधुर स्वर में बोलने वाली कन्या परिवार के लिए सुख और सौभाग्य लेकर आती है। इनका वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखमय रहता है।

जिस घर की स्त्री देर तक सोती है वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। इसलिए देर तक सोने वाली और आलसी लड़की से विवाह सोच समझकर करना चाहिए।झूठ बोलने वाली स्त्रियों का विश्वास नहीं करना चाहिए इन्हें जीवन संगिनी बनाना जोखिम भरा होता है क्योंकि इनका झूठ कभी भी परिवार के लिए संकटकारी होता है।

चाणक्य नीति में इस बात का उल्लेख किया गया है।सिर्फ चेहरे की सुंदरता देखकर लड़की से विवाह नहीं करना चाहिए, बौद्धिक रूप से सुंदर कन्या को जीवन संगिनी बनाना अधिक सुखकरी और कल्याणकारी होता है।विवाह से पहले कन्या के परिवार की आर्थिक, सामाजिक और खानदान की जानकारी प्राप्त कर लें।

चाणक्य कहते हैं रिश्ता हमेशा बराबर वालों के बीच होनी चाहिए अगर आपके स्तर से कन्या के परिवार का स्तर कम है तो विवाह के बाद कई तरह की परेशानियां और उलझनों का सामना करना पड़ता है।

महाभारत के अनुशासन पर्व और चाणक्य नीति दोनों में एक समान बात कही गई है कि विवाह पूर्व यह अवश्य जान लें कि जिस कन्या से आप विवाह करने जा रहे हैं वह कन्या किसी अन्य से प्रेम तो नहीं करती।

कन्या की स्वीकृति होने पर ही उसे पत्नी रूप में स्वीकार करना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम और तालमेल नहीं रहता है। इन्हीं कारणों से प्राचीन काल में स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी।

विवाह से पहले कन्या के बारे यह जरूर जान लेना चाहिए कि यह आपके माता-पिता के रिश्ते से नहीं हों। विवाह में गोत्र मिलाने की परंपरा का आधार भी यही है। माना जाता है कि ऐसा नहीं होने पर संतान संबंधी मामलों में परेशानी आती है।




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