
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आज बहुप्रतीक्षित चेपा प्रसादम वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. अस्थमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से राहत देने का दावा करने वाला यह पारंपरिक आयोजन आज रात 9 बजे नामपल्ली प्रदर्शनी मैदान में शुरू होगा और अगले 24 घंटे तक लगातार जारी रहेगा. देश के विभिन्न राज्यों से लाखों लोगों के इस कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
करीब 176 वर्षों से बाथिनी हरिनाथ गौड़ परिवार इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है. परिवार का दावा है कि विशेष जड़ी-बूटियों से तैयार औषधीय पेस्ट को जीवित कोर्रामिन मछली के बच्चे के मुंह में रखकर मरीज को निगलने के लिए दिया जाता है. मान्यता है कि मछली का बच्चा गले से होते हुए श्वसन तंत्र में मौजूद कफ और अवरोधों को साफ करने में मदद करता है. वहीं, शाकाहारी लोगों के लिए गुड़ के साथ मिश्रित विशेष प्रसाद की व्यवस्था की गई है.
मंगवाई गईं 14 लाख मछलियां
इस विशाल आयोजन को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं. राज्य के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने आयोजन स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. मत्स्य विभाग की निगरानी में लगभग 14 लाख कोर्रामिन मछली के बच्चों की व्यवस्था की गई है ताकि सभी को प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके.
किए गए हैं ये इंतजाम
भीषण गर्मी और भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कतारों में बड़े पंखों, कूलरों और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस और दमकल वाहनों को भी तैनात किया गया है. इसके अलावा तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम ने लोगों की सुविधा के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू की हैं.
क्या है प्रसाद लेने के बाद का नियम?
बाथिनी परिवार ने लोगों से प्रसाद ग्रहण करने के बाद 45 दिनों तक निर्धारित आहार नियमों का पालन करने की अपील की है. साथ ही आगामी आर्द्रा, पुनर्वसु और पुष्यमी कार्थे के दौरान दी जाने वाली औषधीय गोलियों का नियमित सेवन करने की भी सलाह दी गई है.
देशभर से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से समय से पहले पहुंचने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है. यह आयोजन हैदराबाद की सबसे चर्चित पारंपरिक स्वास्थ्य-संबंधी परंपराओं में से एक माना जाता है.





