भरत तिवारी एनकाउंटर केस: पहली गोली चलाने वाले STF जवान की गिरफ्तारी पर मां का बड़ा बयान, पोस्टमार्टम में सामने आईं 5 गोलियों की कहानी

बिहार के भोजपुर जिले के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस ने एसटीएफ के एक जवान को गिरफ्तार किया है. जिस टीम ने भरत का एनकाउंटर किया था, उस टीम में यह जवान शामिल था. इसका नाम अक्षय है. परिवार का आरोप है कि इसी ने भरत पर पहली गोली चलाई थी. वहीं, परिजनो का कहना है कि सिर्फ एक गिरफ्तारी से उन्हें न्याय नहीं मिलेगा. उनका कहना है कि एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. 

भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि सरकार मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्रवाई की शुरुआत कर दी है, लेकिन यह तभी पूरी मानी जाएगी, जब पूरे मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कानून के मुताबिक सजा दिलाई जाएगी. परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी से बदला लेना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और न्याय हासिल करना है. 

भाई और भाभी ने भी की ये मांग

भरत के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी से परिवार का भरोसा मजबूत हुआ है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी और घटना में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. परिवार के अनुसार, भरत पर पहली गोली अक्षय कुमार ने ही चलाई थी.

वहीं भरत की भाभी सुमन देवी ने कहा कि पहली गिरफ्तारी से उम्मीद तो बढ़ी है, लेकिन जब तक सभी जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक न्याय अधूरा रहेगा. उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी आरोपियों के खिलाफ समान कानूनी कार्रवाई की मांग की. 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खड़े किए थे कई सवाल

इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद एनकाउंटर पर कई सवाल उठे थे. रिपोर्ट के मुताबिक भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं. पहली और दूसरी गोली बाएं जांघ में, तीसरी और चौथी गोली दाहिने जांघ में तथा पांचवीं गोली बाएं पैर के पिछले हिस्से में लगी थी. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी शव को देखकर सिहर उठे थे.

एफआईआर के अनुसार, एसटीएफ के जवान ने आत्मरक्षा में फायरिंग की थी. तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की ओर से भी एक राउंड फायरिंग किए जाने का जिक्र है. हालांकि, थानाध्यक्ष की गोली भरत को लगी या नहीं, इसका जिक्र प्राथमिकी में नहीं किया गया है. पुलिस टीम द्वारा पीछा किए जाने पर भरत भूषण तिवारी ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसमें एक गोली थाने के सरकारी वाहन के बोनट पर लगी. पुलिस का दावा है कि कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद वह लगातार फायरिंग करता रहा.

एफआईआर के अनुसार, घटना के दौरान भरत के एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ में पिस्टल थी. उसने पहले पिस्टल फेंक दी, लेकिन जब एक जवान उसे उठाने के लिए आगे बढ़ा तो उसने दोबारा हथियार उठा लिया और पुलिस पर दो राउंड फायरिंग कर दी. इसके बाद एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने आत्मरक्षा में कमर के नीचे चार राउंड फायरिंग की, जिससे भरत घायल होकर गिर पड़ा.

पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से दो खोखे, एक देसी पिस्टल, एक मैगजीन और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए. मामले की जांच के तहत तत्कालीन थानाध्यक्ष की सर्विस पिस्टल, एसटीएफ जवान की सर्विस पिस्टल और आरोपित की देसी पिस्टल को भी जब्त कर लिया गया है.

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

17 जून को भरत भूषण तिवारी फेसबुक लाइव पर आया था. लाइव वीडियो में उसने दावा किया कि वह सुनसान इलाके में है और उसके सामने एसटीएफ तथा भोजपुर पुलिस की टीम मौजूद है. वीडियो में उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे पकड़ने पुलिस पहुंची है. इसके बाद उसने अपना हथियार पुलिस की ओर फेंक दिया और सरेंडर करने की बात कहते हुए फेसबुक लाइव बंद कर दिया.

पुलिस का दावा है कि लाइव खत्म होने के बाद भरत ने दोबारा पिस्टल उठाकर फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई. वहीं परिजन शुरू से इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं और इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. अब एसटीएफ जवान की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है.