
अमेरिका के ISKCON टेंपल (भक्ति सेंटर) में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया कृष्णमय है और हमें उनकी चेतना को जगाना होगा. हम सब एक हैं और इस दुनिया के विरोधाभासों के बीच भी ये गहरी समझ रखते हैं कि इतनी विविधता, टकराव और विरोधाभासों के बावजूद, अंततः सब कुछ कृष्ण ही हैं. यही भगवद् गीता की मुख्य शिक्षा है. जीवन से भागें नहीं डटकर खड़े रहें, अपना कर्तव्य निभाएं और यह समझें कि सब कुछ दिव्य है. अगर ये संदेश हर दिल तक पहुंच जाए, तो हमारी दुनिया सचमुच एक बेहतर जगह बन जाएगी. यह आज की भौतिक सीमाओं में बंधी नहीं रहेगी, बल्कि सभी इंसानों के लिए स्वर्ग जैसी जगह बन जाएगी.”
उन्होंने कहा, “एक कॉर्पोरेट संगठन के बारे में सोचिए: डायरेक्टर और CEO एक रणनीतिक योजना बनाते हैं और अनगिनत लोग उस विजन को साकार करने के लिए मिलकर काम करते हैं. कुछ लोग उस बड़ी योजना को समझते हैं, तो कुछ शायद नहीं, फिर भी हर कोई उसी अंतिम उद्देश्य के लिए योगदान देता है. जब सभी को ये एहसास होता है कि वे एक साझा लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं, तो प्रगति की गति काफी बढ़ जाती है. इस समझ के साथ कि हम सब मिलकर उस दिव्य सेवा में लगे हैं, मैं आप सभी को बधाई देता हूं. आपको इस पवित्र स्थान पर बार-बार लगभग रोज आने का सौभाग्य मिलता है, जिससे आप लगातार कृष्ण चेतना से जुड़े रहते हैं. आज हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी भी मना रहे हैं; ये एक ऐसा संगठन है जो इसी तरह समाज को इस उच्च चेतना को हर जगह ले जाने के लिए तैयार करने का प्रयास करता है.”
यहीं पर पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था प्रभुपाद ने
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क शहर में 26 सेकंड एवेन्यू पहुंचे. ये वही जगह है जहां स्वामी प्रभुपाद ने पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था. इस दौरे के दौरान, उन्होंने शहर में बेघर लोगों की मदद के मकसद से चलाए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया. यह न्यूयॉर्क में 26 सेकंड एवेन्यू स्थित इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ का जश्न है. इस मौके पर आरएसएस प्रमुख ने भगवान की आरती और प्रार्थान की.
‘हिंदू सनातन धर्म को हर घर तक कैसे पहुंचे इस पर कर रहे हैं काम’
इस्कॉन की गवर्निंग बॉडी कमीशन (GBC) के सदस्य गौरंग दास ने कहा, “यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि सरसंघचालक मोहन भागवत जी आज मैनहट्टन में इस्कॉन मंदिर आ रहे हैं. 1966 में इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क में ही इस्कॉन की स्थापना की थी. इस साल, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है, इस्कॉन अपनी 60वीं वर्षगांठ मना रहा है. हम मोहन भागवत के साथ तीन मुख्य विषयों पर चर्चा कर रहे हैं: आध्यात्मिकता, सेवा और सामाजिक बदलाव. पिछले एक साल से, हम ‘जीरो हंगर न्यूयॉर्क’ नाम से एक बड़ा अभियान चला रहे हैं. आज, मोहन भागवत 1,00,000वीं प्लेट परोसे जाने के खास मौके का उद्घाटन करेंगे, इसीलिए हमने उन्हें यह निमंत्रण दिया था.”
उन्होंने आगे कहा, “मोहन भागवत की यात्रा के दौरान, हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि हिंदू सनातन धर्म को हर घर तक कैसे पहुंचाया जाए और लोगों को इसे अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनाने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए. हम उनके आभारी हैं कि उन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर इस्कॉन मंदिर का दौरा किया और अपने संबोधन से हम सभी को आशीर्वाद दिया. इस्कॉन की ओर से, मैं, गौरंग दास, उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मदद की. आज के कार्यक्रम के बाद, कल सुबह एक अंतर-धार्मिक सम्मेलन होगा, जिसमें मोहन भागवत, इस्कॉन और कई अन्य धार्मिक संगठन शामिल होंगे.”
मोहन भागवत के कार्यक्रम का न्यूयॉर्क में विरोध
न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर विरोध भी किया जा रहा है. न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मम्दानी ने RSS के खिलाफ टिप्पणी की है. अमेरिका में कई हिंदू संगठनों ने भी मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले इस कार्यक्रम का विरोध किया है. कार्यक्रम का नाम यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन है और इसका आयोजन AHEAD फोरम कर रहा है.
हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स नाम के संगठन की डायरेक्टर सुनीता विश्वनाथ ने बताया कि 61 अलग-अलग धर्मों और सेक्युलर संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ एक ओपन लेटर लिखा है. उन्होंने कहा कि इन संगठनों के कई लोग खुद वहां जाएंगे और कहेंगे कि RSS और उनकी विचारधारा हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करती.





