
प्रदर्शनकारी छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई लाठीचार्ज की घटना के विरोध में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने कल पीएम नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर धरना दिया. बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया. पीएम आवास के बाहर धरने का विरोध करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मानसून सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने के लिए छात्रों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार नीट पेपर लीक से जुड़े सभी मुद्दों और युवाओं की हर जायज चिंताओं के समाधान पर संसद में चर्चा करने को लेकर प्रतिबद्ध है. प्रधान ने पीएम आवास के बाहर धरने की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष संसद के मानसून सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने के लिए छात्रों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारे छात्र किसी राजनीतिक अभियान के मोहरे की तरह इस्तेमाल किए जाने से कहीं बेहतर व्यवहार के हकदार हैं.
‘राजनीतिक तमाशा खड़ा करने की कोशिश’
राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के बाद शिक्षा मंत्री प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने एक पोस्ट में कहा, “नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने के लिए छात्रों को बेशर्मी से राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इन लोगों पीएम आवास के बाहर धरना देने का फैसला किया, जिससे आम लोगों को खासी परेशानी हुई. सुरक्षा के तय नियमों की अनदेखी भी की गई.”
उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा, “सरकार की ओर से विस्तृत चर्चा के लिए राजी होने की बात कहने के बाद भी, कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस की जगह राजनीतिक तमाशा खड़ा करने का विकल्प चुना. उनका मकसद छात्रों के लिए समाधान खोजना कभी रहा ही नहीं, बल्कि राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए हंगामा करना रहा है.” उन्होंने आगे कहा, “राहुल के लिए यह मामला छात्रों से जुड़ा नहीं है. यह मामला चर्चा के सभी सही रास्ते खुलने के बाद भी टकराव की स्थिति पैदा करने का है.”
सुधार और जवाबदेही हमारी जिम्मेदारीः प्रधान
छात्रों की चिंता के समाधान का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा, “हमारी सरकार नीट पर चर्चा करने और सदन में युवाओं की हर जायज चिंता का समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हमारे छात्र राजनीतिक अभियान में महज मोहरे की तरह इस्तेमाल किए जाने की जगह कहीं बेहतर व्यवहार के हकदार हैं. वे अफरातफरी की जगह निश्चितता, नारों की जगह समाधान और व्यवधान की जगह जिम्मेदारी के हकदार हैं.”
प्रधान ने यह भी कहा, “हमें अपने छात्रों को सिर्फ नाराजगी ही नहीं, बल्कि जवाब, सुधार और जवाबदेही भी देनी है. हमारी सरकार ठीक यही करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
इससे पहले कल मंगलवार को दोपहर बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कई अन्य वरिष्ठ नेता अचानक प्रधानमंत्री के सरकारी आवास के बाहर धरने पर बैठ गए और नीट पेपर लीक मामले में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रधान के इस्तीफे की मांग की.





