
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक कार्यक्रम में नई संसद की इमारत को बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर बताया. उन्होंने कहा, “नई इमारत में अपनापन नहीं है. छत बहुत ऊंची है और लेआउट (पंखे जैसा) दूरी का अहसास कराता है. ये हमारी राजनीति में ध्रुवीकरण को दर्शाता है. राष्ट्रीय राजधानी पर अपनी भौतिक छाप छोड़ने की एक खास इच्छा,रही है, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि सभी बदलाव जरूरी नहीं होते.”
पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नई किताब ‘हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’ के लॉन्च पर उन्होंने कहा, “नई संसद सचमुच एक तरह के बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर जैसी लगती है, और इसके कई कारण हैं… इसकी छत बहुत ऊंची है, जिससे अपनापन महसूस होने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती. पुराने चैंबर में एक तरह का अपनापन था जो बातचीत और चर्चा को बढ़ावा देता था.” तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद रहे थरूर ने कहा, “इस बदलाव के साथ ये चीजे भी साथ आई हैं.”
‘यहां अपनापन नहीं है और लोगों में बातचीत भी नहीं हो पाती’
थरूर ने कहा, “इस जगह में जान नहीं है, अपनापन नहीं है, बातचीत को बढ़ावा नहीं मिलता और सेंट्रल हॉल भी नहीं है जहां मौजूदा और पूर्व सांसद, ऑब्जर्वर और पुराने समय के मीडियाकर्मी अनौपचारिक बातचीत कर सकें. ये सभी बातें पार्टियों के बीच आपसी सहयोग और मेलजोल की कमी को दिखाती हैं, जो आजकल संसद की एक पहचान बन गई है.”
कांग्रेस नेता ने लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव पर कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने तर्क दिया कि भले ही निचले सदन में इसके लिए “जगह” हो, लेकिन इस कदम से “सार्थक संसदीय चर्चा और विचार-विमर्श की भावना” खत्म हो जाएगी. एक तीखी तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि सांसद “अजनबियों के झुंड” बनकर रह जाएंगे, जो “चीनी पीपल्स कंसल्टेटिव कांग्रेस की तरह, बस रस्म के तौर पर, महान नेता की घोषणाओं पर एक साथ मेज थपथपाकर तालियां बजाएंगे.” उन्होंने कहा, “अगर यही मकसद है, तो यह संसद के उस मकसद से बिल्कुल अलग है जिसे हम सबने अब तक समझा है.”
तारीफ में क्या कहा?
थरूर ने नई संसद की कुछ तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि इससे बैठने की पुरानी व्यवस्था की “दिक्कत” खत्म हो गई है, जिसमें सदस्यों को “सिकुड़कर बैठना” पड़ता था और रास्ते तक पहुंचने के लिए साथियों के घुटनों के बीच से निकलना पड़ता था. वह दिक्कत अब खत्म हो गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन किया था. ये सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है. इसे औपनिवेशिक दौर की सरकारी इमारतों की जगह लेने के लिए बनाया गया है.





