‘इंद्रदेव’ का कहर या 36 बिरादरी का विरोध? सहारनपुर में क्यों रद्द हुई अखिलेश यादव की रैली, जयंत की पार्टी ने बोला हमला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच बढ़ती तल्खी अब जमीन पर दिखाई देने लगी है. सहारनपुर में 6 सितंबर को प्रस्तावित सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली रद्द कर दी गई है. रैली को लेकर सपा की ओर से जहां खराब मौसम और भारी बारिश की संभावना को वजह बताया गया है. वहीं राष्ट्रीय लोकदल ने दावा किया है कि चौधरी परिवार पर की गई टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी में 36 बिरादरी के बीच बने विरोध के माहौल का असर रैली पर पड़ा है. 

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और रैली के आयोजक चौधरी रुद्रसैन ने बुधवार को रैली स्थगित करने की जानकारी दी. उनका कहना था कि 6 सितंबर को भारी बारिश की संभावना और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए कार्यक्रम स्थगित किया गया है. नई तारीख अखिलेश यादव से चर्चा के बाद तय की जाएगी. संभावित तौर पर रैली अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है. 

लेकिन रैली रद्द होते ही उठे सियासी सवाल

रैली स्थगित होने के साथ ही पश्चिमी यूपी में इसके पीछे की राजनीतिक वजहों को लेकर चर्चा तेज हो गई. दरअसल, अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाट समाज और चौधरी परिवार के सम्मान का मुद्दा गरमा गया है. जयंत चौधरी ने भी इस टिप्पणी को जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए अखिलेश पर निशाना साधा था.

इसके बाद सहारनपुर में दोनों दलों की प्रस्तावित रैलियां आमने-सामने आ गई थीं. 3 सितंबर को जयंत चौधरी की ‘स्वाभिमान रैली’ और उसके तीन दिन बाद 6 सितंबर को अखिलेश यादव का ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ प्रस्तावित था. ऐसे में सहारनपुर पश्चिमी यूपी की सियासी ताकत का बड़ा अखाड़ा बनता दिख रहा था. 

RLD का सीधा हमला- चौधरी परिवार हमारा सम्मान

रैली रद्द होने के बाद RLD के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि चौधरी परिवार हमारा सम्मान और स्वाभिमान है। उस पर टिप्पणी करोगे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पैर रखने नहीं देंगे.

RLD का दावा है कि चौधरी परिवार पर टिप्पणी के विरोध में पश्चिमी यूपी की 36 बिरादरी एकजुट हुई और सपा की प्रस्तावित रैली के बहिष्कार का निर्णय लिया गया. पार्टी ने इसे स्थानीय स्तर पर पैदा हुए जनाक्रोश का परिणाम बताया है.

2027 से पहले पश्चिमी यूपी में नई सियासी जंग

सहारनपुर की घटनाक्रम को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं पर RLD की मजबूत पकड़ और सपा के PDA समीकरण के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार तेज हो रहा है. खास बात यह है कि सहारनपुर में पहले जयंत चौधरी की रैली और उसके बाद अखिलेश यादव का कार्यक्रम होना दोनों दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका माना जा रहा था. अब अखिलेश की रैली स्थगित होने से सियासी बहस और तेज हो गई है.

मौसम की वजह या सियासी दबाव?

सपा की ओर से रैली स्थगित करने की आधिकारिक वजह मौसम बताई गई है. लेकिन दूसरी तरफ RLD इसे 36 बिरादरी के विरोध से जोड़ रही है. ऐसे में सवाल यही है कि क्या रैली वाकई सिर्फ मौसम की वजह से टली है या चौधरी परिवार पर टिप्पणी के बाद पैदा हुआ राजनीतिक दबाव भी इसकी एक वजह बना? फिलहाल सपा ने नई तारीख का ऐलान नहीं किया है.

इस बीच अखिलेश यादव का 2 सितंबर को सहारनपुर दौरा प्रस्तावित है, जहां वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन के आवास पर पहुंचेंगे. रैली स्थगित होने के बाद इस दौरे का कार्यक्रम सामने आने से सहारनपुर की सियासत में चर्चाएं और बढ़ गई हैं.