शाहाबाद पुलिस का अमानवीय चेहरा ,  हमले में घायल प्रधान का घंटो थाने में बहता रहा खून  

दबंगो ने ग्राम प्रधान पर कियस था हंसिये से किया हमला

रिपोर्ट : श्यामजी गुप्ता , रीडर टाइम्स

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शाहाबाद। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मिश्रीपुर मे मंगलवार की देर शाम ग्राम प्रधान पर गाँव के ही व्यक्ति ने चारा काट‌ने वाले हंसिये से वार कर दिया जिससे प्रधान की ऊंगली काफी हद तक कट गयी तथा अधिक खून निकलने से सफेद बनियान भी खूनी रंग से रंग गयी। जानकारी के अनुसार मिश्रीपुर ग्राम प्रधान राजकुमार गौतम जो कि हरिजन बिरादरी से है वह अपने गाँव मे पंचायत घर का निर्माण करवा रहा था। उस दरम्यान उसी गाँव के कलेक्टर सिंह और उसका बडा भाई खेत से चारा काट घर जा रहा था। प्रधान के मुताबिक कलेक्टर सिंह एवं उसका परिवार उससे प्रधानी चुनावी के वक्त से ही बुराई मनाते चले आ रहे। उसी के चलते उपरोक्त दोनो भाइयों द्वारा जान-बूझकर विवाद कर दिया गया। वाद विवाद बढ जाने पर कलक्टर सिंह ने हाथ मे थमी हंसिया से हमला कर दिया। जिससे प्रधान  का हाथ  काफी घायल हो गया । वही काम करने आये राजगीर को भी दोनो भाइयों द्वारा पीटा गया। घटना की जानकारी परिजनो द्वारा डायल 100 को दी गयी।

सूचना पर पहुँची डायल 100 आरोपी कलक्टर सिंह और पिडीत प्रधान के पिता को पकड कर कोतवाली‌ ले आई जहाँ डायल 100 द्वारा स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। वही घायलावस्था‌ में आनन फानन प्रधान राजगीर की बाईक पर शाहाबाद कोतवाली लाया गया। जब पीडित प्रधान व बाइक से कोतवाली पहुँचा तो कोतवाली प्रांगण मे स्टाफ सहित खडे कोतवाल जितेन्द्र कुमार ओझा को पीडित द्वारा बताया गया कि मै वर्तमान मे ग्राम मिश्रीपुर का प्रधान हूँ। लेकिन उसकी पूरी बात को ना सुनते हुए ना ही बैठने को कहा गया। जब कि प्रधान के हाथ  से काफी खून निकल कर जमीन पर लगातार गिरता‌ जा रहा था‌ एंव सफेद बनियान‌ खून से सन गयी थी। ठीक इसके विपरीत कोतवाल द्वारा उससे कहा गया कि पहले चोट का इलाज कराने जाओ बहुत खून निकल रहा है।

कोतवाल के आदेशानुसार पीडित प्रधान खून निकलती उंगली को दबाये पुनः उसी मिस्त्री की बाइक पर सीएचसी गया।जहाँ उसका इलाज कर नाम पता जूनियर डाक्टरो द्वारा दर्ज कर लिया। क्या ये ही पुलिस का मित्रवत चेहरा जो एक पीडित वो भी‌ जनता द्वारा चुना गया वर्तमान प्रधान की बात नही सुनी गयी।जब जनप्रतिनिधि के साथ कोतवाली पुलिस का ये रवैया है। तो क्या होता होगा आम फरियादियों के साथ। जबकि किसी भी घटना दुर्घटना से घायल व्यक्ति के कोतवाली आने पर उस पीडित व्यक्ति की डाक्टरी परीक्षण कराने की पूरी जिम्मेदारी कोतवाली पुलिस की होती है। डाक्टरी परीक्षण कराने के लिए कानूनन होमगार्ड अथवा कांस्टेबल को मरीज‌ के साथ सीएचसी भेजकर डाक्टरी कराने का प्रावधान हैं। लेकिन यहाँ तो सब विपरीत हो रहा वो भी  जनता द्वारा चुने गये  व्यक्ति के साथ चाहे वो किसी भी ओहदे पर हो पर होता वो भी जनप्रतिनिधि ही है।लेकिन हमारी पुलिस का मित्रवत रवैया सिर्फ कागजों मे ही दिखता है न कि धरातल पर। यह चितंन का विषय हैं कि एक जनप्रतिनिधि जो‌कि प्रधान पद पर काबिज हो उसकी बात को ना सुनना और डाक्टरी के लिए घायलावस्था मे अकेला भेज देना। तो आये हुए आम फरियादियों की क्या सुनवाई होती होगी। वही अब ये देखना हैं कि प्रधान संघ कहा तक साथ देता हैं इस प्रधान का।




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