
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 का पेपर रद्द होने के बाद कई बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी. पीड़ित परिवारों को लिए ये ऐसा दर्द है जो ताउम्र रहेगा. शनिवार को पेपर लीक को लेकर मचे बवाल के बीत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उनके इस्तीफे से इन परिवारों का जख्म भर जाएगा या कम हो जाएगा. आइये जानते हैं क्या कहना है इन परिवारों का.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अपने बच्चों को खो चुके माता-पिता के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं है. इन परिवारों का कहना है कि सरकार ने नीट परीक्षा देने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के दर्द को कभी नहीं समझा. परिवारों ने शिक्षा प्रणाली में बदलावों की मांग की ताकि भविष्य में पेपर लीक होने या किसी अन्य किसी परीक्षा में गड़बड़ी के चलते पेपर रद्द न हो. इसके साथ ही परिवारों ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई मारपीट और छात्रों के दबाव के बाद धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने पर भी अपना गुस्सा व्यक्त किया.
इस्तीफा बच्चों को वापस नहीं ला सकता
उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के रहने वाले एक 21 साल के नीट अभ्यर्थी के पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके बेटे ने तीसरी बार परीक्षा दी थी. उन्होंने बताया कि मई में उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने बताया कि आज भी उनकी पत्नी इस सदमे से उबर नहीं पाई वो अभी भी बेटे की मौत के बाद सदमे में हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी मुआवजा उनके बेटे को वापस नहीं ला सकता.उन्होंने कहा कि बेटे के जाने के बाद जिंदगी में जो खालीपन आ गया वो अब कभी नहीं भरेगा.
छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना
इसके साथ ही उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा छात्रों के साथ की गई मारपीट के बावजूद छात्र डटे रहे. उन्होंने भविष्य में ऐसी ही घटना को रोकने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की मांग की. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह विरोध प्रदर्शन भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने में मददगार साबित होगा. उन्होंने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान ने विरोध प्रदर्शन शुरू होने के तुरंत बाद इस्तीफा दे दिया होता तो जंतर-मंदिर में हुई हिंसा को टाला जा सकता था.
जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए
नागपुर में 20 मई को आत्महत्या करने वाली 18 साल की नीट अभ्यर्थी की मां ने कहा कि उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अपनी जगह है, लेकिन वह उन बच्चों को धन्यवाद देना चाहती हैं जिन्होंने उनके बच्चे के लिए आवाज उठाई और पुलिस की कार्रवाई का सामना किया. उन्होंने कहा ‘मैं चाहती हूं कि पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिले’.
‘इस्तीफे से मेरी बेटी वापस तो नहीं आएगी’
वहीं छात्रा के पिता ने कहा ‘आज न्याय मिल गया. इस्तीफे से मेरी बेटी वापस तो नहीं आएगी, लेकिन कम से कम उसकी आत्मा को शांति तो मिलेगी’. मुआवजे के बारे में उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के बाद उनके रिश्तेदारों ने उसकी शिक्षा के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने में उनकी मदद की. उन्होंने कहा कि अगर मुआवजा मिलता है तो वो उससे बाकी का कर्ज चुका देंगे. उनकी पत्नी ने नागपुर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया था.
सरकार ने गलती मानने में बहुत देर की
इधर राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के एक मृत नीट अभ्यर्थी के पिता ने कहा कि सरकारों को यह समझना चाहिए कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्रों को किस तरह के मानसिक दबाव और पीड़ा से गुजरना पड़ता है. उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए.
‘धर्मेंद्र प्रधान ने दबाव में इस्तीफा दिया’
उन्होंने कहा कि इतने बच्चों की मौत के बाद भी सरकार अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी.उन्होंने कहा ‘ जब इतने सारे छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, पुलिस की लाठियों का सामना किया और जंतर-मंतर छोड़ने से इनकार कर दिया, तब जाकर सरकार मानी’. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया बल्कि इन बच्चों के दबाव में उन्होंने इस्तीफा दिया. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मुआवजा उनकी बेटी को वापस नहीं ला सकता. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में गंभीर सुधार करेगी और इसे पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाएगी.
सरकार हमारे दर्द को नहीं समझ सकती
देहरादून की 23 साल की नीट अभ्यर्थी की मां ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पता चलता है कि सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, हालांकि इसमें देरी हुई है. उन्होंने कहा ‘मेरी बेटी की मौत उसकी गलती के बिना हुई. वो गहरे अवसाद में थी क्योंकि यह उसका आखिरी मौका था. सरकार उसके और हमारे दर्द को नहीं समझ सकती. मुआवजा उसे वापस नहीं ला सकता, लेकिन ढांचागत सुधार भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोक सकते हैं’.उन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद नीट उम्मीदवारों की मौत के लिए केंद्र सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया.
‘वो हमारी इकलौती संतान थी’
वहीं ओडिशा के बरहामपुर शहर में पिछले सप्ताह आत्महत्या करने वाली 20 साल की नीट अभ्यर्थी की मां ने कहा कि उनकी बेटी परीक्षा पास नहीं कर सकी थी. उन्होंने कहा कि उनके लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कोई मायने नहीं रखता. उन्होंने कहा ‘वो हमारी इकलौती संतान थी. हमारे लिए इससे क्या फर्क पड़ता है कि शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया या नहीं? लेकिन एक मां होने के नाते मैं चाहती हूं कि नीट परीक्षा में सिर्फ मेधावी छात्रों को ही प्रवेश मिलना चाहिए, न कि उन लोगों को जो गलत तरीकों से परीक्षा पास करते हैं.’
अब लगता है बहन को कुछ न्याय मिला
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में आत्महत्या करने वाली 19 साल की नीट छात्रा के भाई ने कहा कि कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से लोगों को नीट उम्मीदवारों का दर्द समझने में मदद मिली है, क्योंकि उनकी बहन का सुसाइड नोट, जिसमें उसने लिखा था कि वो अब और बर्दाश्त नहीं कर पाएगी’, विरोध प्रदर्शन के दौरान वायरल हो गया था. उन्होंने कहा ‘आज मैं चैन से सो सकता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी बहन को कुछ हद तक न्याय मिला है’ उनकी छोटी बहन ने नीट की पुनर्परीक्षा देने के बाद आत्महत्या कर ली थी.





