
बढ़ता वर्क प्रेशर, करियर को लेकर असमंजस, रिश्तों में चुनौतियां और बदलता सामाजिक माहौल भारत में मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस की जरूरत को तेजी से बढ़ा रहे हैं. लेकिन अब चुनौती सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की नहीं है, बल्कि लोग अपने व्यवहार, सोचने के तरीके और फैसले लेने की क्षमता को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं.
मार्केट रिसर्च फर्म IMARC ग्रुप के मुताबिक, भारत का मेंटल हेल्थ मार्केट 2025 में 20.82 अरब डॉलर यानी करीब ₹1.75 लाख करोड़ का था. इसके 2034 तक बढ़कर 27.36 अरब डॉलर यानी करीब ₹2.3 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. बढ़ती जागरूकता, वर्कप्लेस स्ट्रेस, रिश्तों से जुड़ी चुनौतियां, फाइनेंशियल अनसर्टेनिटी और डिजिटल मेंटल हेल्थ सर्विस का बढ़ता इस्तेमाल इस बाजार को रफ्तार दे रहे हैं.
अब सिर्फ जानकारी नहीं, डिसिजन क्लियरिटी की जरूरत
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं और जानकारी की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद एक बड़ी समस्या बनी हुई है. लोगों के पास जानकारी तो है, लेकिन उसे सही फैसले में बदलना हमेशा आसान नहीं होता. करियर चुनने से लेकर वर्कप्लेस रिलेशनशिप्स, लीडरशिप डिसीजन्स और पर्सनल रिलेशनशिप तक, हर जगह व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों के साथ-साथ अपने व्यवहार के पैटर्न को समझना पड़ता है.
यहीं बढ़ रही है बिहेवियरल इंटेलिजेंस की भूमिका
बिहेवियरल इंटेलिजेंस में स्ट्रक्चर असेसमेंट्स और बिहेवियरल साइंस की मदद से यह समझने की कोशिश की जाती है कि कोई व्यक्ति कैसे सोचता है, अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया देता है, दूसरों के साथ कैसे इंटरेक्ट करता है और फैसले किस तरह लेता है.
पर्सनालिटी टेस्ट से आगे बढ़ रहा बाजार
सामान्य पर्सनालिटी टेस्ट से अलग बिहेवियरल इंटेलिजेंस का फोकस सिर्फ किसी व्यक्ति के पर्सनालिटी ट्रेट्स पहचानने तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल करियर प्लानिंग, रिलेशनशिप कैपेबिलिटी, वर्कप्लेस इंगेजमेंट और लीडरशिप डेवलपमेंट जैसे प्रैक्टिकल एरिया में किया जा सकता है. इसी इमर्जिंग अपॉर्चुनिटी को देखते हुए बिहेवियरल इंटेलिजेंस स्टार्टअप SynqSol ने अपना डिसीजन इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पेश किया है. यह प्लेटफॉर्म कंपनी के प्रोप्राइटरी सिंक ह्यूमन ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित है.
कंपनी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म में साइकोलॉजिस्ट-डिजाइन्ड बिहेवियरल असेसमेंट्स्, स्ट्रक्चर्ड इनसाइट और ह्यूमनन-रिव्यूड रिपोर्ट्स को एक साथ लाया गया है. इसके जरिए करियर असेसमेंट, रिलेशनशिप एंड कॉम्पेटिबिलिटी असेसमेंट, स्ट्रेस एंड वेल-विंग रिपोर्ट्स, बिहेवियरल ट्रेकिंग, काउंसलिंग सपोर्ट और सेल्फ-हेल्प रिसोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
भारत के हिसाब से बिहेवियरल असेसमेंट
इस तरह के प्लेटफॉर्म के लिए भारतीय मार्केट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां किसी व्यक्ति के फैसलों पर सिर्फ उसकी व्यक्तिगत पसंद का असर नहीं होता. परिवार की अपेक्षाएं, सामाजिक रिश्ते, शिक्षा, नौकरी का माहौल और कल्चर फैक्टर्स भी डिसिजन मेकिंग में बड़ी भूमिका निभाते हैं. SynqSol के फाउंडर वेंकेट राव के मुताबिक, आज लोगों के पास पहले के मुकाबले ज्यादा जानकारी और ऑप्शन हैं. लेकिन ज्यादा विकल्प होने का मतलब यह नहीं है कि डिसिजन लेना आसान हो गया है. बिहेवियरल इंटेलिजेंस लोगों को अपने बिहेवियरल पैटर्न, स्ट्रेन्थ और अलग-अलग परिस्थितियों में रिस्पॉन्स को समझने में मदद कर सकती है.
वर्कप्लेस से एजुकेशन तक बढ़ सकता है इस्तेमाल
बिहेवियरल इंटेलिजेंस का बाजार सिर्फ वेलनेस तक सीमित नहीं है. कंपनियां भी एम्पलॉय इंगेजमेंट, टीम डायनामिक्स, लीडरशिप और वर्कप्लेस रिलेशनशिप्स को बेहतर समझने के लिए बिहेवियरल इंसाइट का इस्तेमाल कर सकती हैं. वहीं एजुकेशन सेक्टर में इसका इस्तेमाल छात्रों को उनकी स्ट्रेन्थ परफॉर्मेंस और संभावित करियर डायरेक्शन को समझने में मदद करने के लिए किया जा सकता है.
मेंटल वेलनेस से डिसीजन ईकोनॉमी तक
भारत मेंमेंटल वेलनेस पर बढ़ती चर्चा अब एक बड़े ट्रेंड की तरफ इशारा कर रही है, इसमें प्रिवेंशन, सेल्फ-अवेयरनेस और अर्ली इंटरवेंशन शामिल हैं. जहां ट्रेडिशनल मेंटल हेल्थ सर्विस मुख्य रूप से समस्या की पहचान और ट्रीटमेंट पर फोकस करती है, वहीं बिहेवियरल इंटेलिजेंस रोजमर्रा के फैसलों में सेल्फ अवेयरनेस और क्लियरिटी की एक एक्स्ट्रा लेयर जोड़ने की कोशिश कर रही है. आने वाले सालों में मेंटल हेल्थ ईकोसिस्टम सिर्फ काउंसलिंग और ट्रीटमेंट तक सीमित न रहकर बिहेवियरल इनसाइट, डिसिजन इंटेलिजेंस और सेल्फ अवेयरनेस सोल्यूशन तक पहुंच सकता है. यही बदलाव स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कंपनी के लिए इस तेजी से बढ़ते बाजार में बिजनेस की संभावनाएं पैदा कर सकता है.





