आतंकवाद पर सख्त रुख से इनोवेशन तक, SCO बिश्केक घोषणा में दिखी भारत की प्राथमिकताओं की झलक

किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी 13 प्रमुख परिणामों के साथ खत्म हुई, जिनमें ऐतिहासिक बिश्केक घोषणा को अपनाना, चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करना और 20 से अधिक फैसले लेना शामिल हैं. इनमें अंग्रेजी को एससीओ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने और सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए एक नया यूनिवर्सल सेंटर बनाने पर सहमति शामिल है. 

SCO बिश्केक घोषणा में भारत की प्राथमिकताओं को जगह दी गई. ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ के विचार को संवाद को आगे बढ़ाने के आधार के रूप में दोहराया गया. साथ ही सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबले के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी संगठनों का भाड़े के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशों को अस्वीकार्य बताया. 

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘दोहरा मापदंड’ अस्वीकार्य

सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘दोहरा मापदंड’ अस्वीकार्य बताया गया. शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान किया गया, जिसमें आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही से निपटना भी शामिल है. इसके अलावा युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से वैज्ञानिक, तकनीकी और इनोवेशन संबंधी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया. इसके लिए SCO यंग साइंटिस्ट फोरम के नियमित आयोजन की बात कही गई. यह SCO में भारत की पहल है.

SCO में भारत की पहल

एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल नेताओं ने 2026 की शरद ऋतु में भारत में SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम आयोजित किए जाने का स्वागत किया. सदस्य देशों ने कहा कि वो युवा सहयोग को और मजबूत करने के लिए काम करेंगे. इस संदर्भ में SCO यंग ऑथर्स कॉन्फ्रेंस के योगदान को भी रेखांकित किया गया. यह भी SCO में भारत की ही पहल है.

SCO के चार्टर में संशोधन और परिवर्धन संबंधी प्रोटोकॉल को मंजूरी

वहीं, नेताओं ने 7 जून, 2002 के शंघाई सहयोग संगठन के चार्टर में संशोधन और परिवर्धन संबंधी प्रोटोकॉल को भी मंजूरी दी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इससे भारत को एससीओ के विकसित होते संस्थागत ढांचे को आकार देने में सक्रिय रूप से भाग लेने में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि शंघाई सहयोग संगठन के भविष्य के कामकाज में भारत के हितों को उचित रूप से प्रतिबिंबित किया जाए. इसके अलावा एससीओ ढांचे के भीतर अंग्रेजी को औपचारिक रूप से शामिल करने में भी मदद मिलेगी.