माँ तो आखिर माँ होती है

maa

maa

माँ यकीनन महान होती है
धूप में साएबान होती है
उसका गुस्सा भी प्यार की है उपज
माँ सदा मेहरबान होती है
कैसे बच्चे ये भूल जाते है ?
माँ की बच्चो में जान होती है
उसका हर बोल है यकीं परवर
माँ की सच्ची ज़बान होती है
माँ की कुरबत में काबा-ओ-कशी
माँ खुदा के सामान होती है
माँ के दिल की दुआओं से हम पर
जिंदगी मेहरबान होती है
उसकी ममता का कोई पार नहीं
माँ मुहब्बत की कान होती है
वो है इक कायनात की मज़हर
माँ मुकम्मल जहान होती है
माँ की अज़मत ‘ ऋषि ‘किसी से भी
कब ज़बां से बयान होती है