हरदोई के कटरी पारसोला गांव के पास गंगा नदी का बदला रुख

 

संवाददाता आशीष गुप्ता
रीडर टाइम्स न्यूज़
बिलग्राम तहसील क्षेत्र के ग्राम कटरी पारसोला निहाल पुरवा मक्कू पुरवा आदि गांव के पास बदला गंगा का रुख गंगा नदी ने रुख बदलने से कटान,की संभावना बन गई एक दर्जन से जादा परिवारों के मकान गंगा में समाए चुके है बांधो से पानी छोड़ने से उफनाई गंगा के तेज बहाव के चलते बदला धार का रुख बढ़ा जल स्तर तेजी से बढ़ा है गंगा के किनारे बसे लोगो की खेती पर संकट खड़ा हो गया है खेत मे खड़ी फसल में पानी भरने लगा है वही बबलू बिलुहि निवासी बताते है कि मेरी पंद्रह बीघा में आलू की फसल बोई थी जो पंद्रह बीघा के पूरे खेत मे पानी भर गया है म्यूरा से लेकर मेहंदी घाट तक पूरा क्षेत पानी मे डूबा हुआ है।

अब किसानों की फसलों का संकट सताने लगा है गंगा किनारे रह रहे लोगों की बढ़ गई हैं मुश्किलें कुछ अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल लोग तो अपने हाथों से कटान कर रहे गाँव व अपने आशियाने हटाने को मजबूर किसान गांव वालों की माने तो हर वर्ष इसी तरह परेशानियों क् सामना करना पड़ता है लेकिन अभी तक कोई शासन प्रशासन से जमीन नही दी गई है।

उच्च अधिकारी मौके पर नही गया है लेखपाल मोके पर जा कर आंकलन कर रहे व पैनी नजर भी बनाये हुए है 12 से जादा घर गंगा की धार की चपेट में लोग परेशान है परिवार वाले इस सर्दी में कहा रहे ये उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कुछ लोग तो पन्नी तान कर गुजर कर रहे है प्रशासन की तरफ से कई परिवरों को हटाकर सुरच्छित स्थान ग्राम समाज की जमीन पर रहने के लिए कहा गया है जनप्रतिनिधियों से कोई भी मदद न करने का लगाया आरोप वही मदद की आस लगा रहे गांव के पीड़ित लोग के निहाल पुरवा मक्कू पुरवा कटरी पारसोला आदि गांव के लोग ज्यादातर किसानी क् काम कर अपना परिवार का पालन पोषण करते हैं।

अब उनके लिए संकट खड़ा हो गया वही ग्राम प्रधान पर भी लगाए गंभीर आरोप अभी तक ग्राम प्रधान मोके पर नही गया न ही किसी प्रकार की मदद की बात बताई ग्राम वासियों ने बताया है की गांव में न तो हैंड पम्प सही है वो काफी दिनों से खराब पड़ा है व स्वच्छ भारत मिशन केवल कागजों पर सिमट कर रह गया कहीं पर जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रहा है वह गांव में बने कुछ शौचालय जो अधूरे पड़े हुए हैं वह कुछ लोगों ने तो शौचालय के अंदर सामान घर बना दिया है वह उस गांव में देखी जाए तो सड़क भी रेत की बनी हुई है जो निकलने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है चुनाव नजदीक आते ही लोग तरह-तरह के वादे करते हैं लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद उन वादों को भूल जाते हैं लेकिन एक कम पढ़े लिखे किसान आखिर करें तो क्या करें।