स्वछता सर्वेक्षण में पहले नम्बर पर अपना ताज बरक़रार रखे हुए है इंदौर , तेजी से स्वच्छ हो रहा है गाजियाबाद भी

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इंदौर:- स्वछता मिसन अभियान पर लगातार इंदौर और भोपाल खरी उतर रही है| इस वर्ष भी इंदौर पहले स्थान पर है और भोपाल दूसरे स्थान पर है| वंही चंडीगढ़ को तीसरा स्थान घोषित किया गया| केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को नई दिल्ली में इसका ऐलान किया। इस ऐलान के बाद जहां इंदौरवासी खुशी से झूम उठे वहीं उनके जेहन में अब यह बात भी है कि इस ताज को बचाए रखने के लिए अब उन्हें दोगुनी मेहनत से काम करना होगा।

वंही गंदगी की वजह से स्मार्ट सिटी की दौड़ से पिछड़ चुके उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद ने बुधवार (16 मई) को बड़ी कामयाबी हासिल की| शहर ने स्वच्छ सर्वेक्षण में लंबी छलांग लगाते हुए 36वीं रैंक हासिल की है| साल 2017 में ये रैंकिंग 359 थी| इस छलांग की वजह से ही गाजियाबाद को इंडियाज फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी का ताज मिला है|

एमपी सीएम बोले- ये गर्व और प्रसन्नता का क्षण

चौहान ने अपने ट्वीट में कहा, ‘गर्व और प्रसन्नता का क्षण है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में हमारे इंदौर और भोपाल ने श्रेष्ठता बरकरार रखते हुए फिर से देशभर में पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है| इन महानगरों के नागरिकों की जागरूकता, लगन और संकल्प के लिए अभिनन्दन और आभार व्यक्त करता हूं|’
एक अन्य ट्वीट में चौहान ने कहा, ‘स्वच्छता के लिए अथक प्रयास, जागरूकता और नियोजन ने इंदौर और भोपाल को शीर्ष बनाया| ये हमारी नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह, प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल, उनकी टीम के साथ इंदौर नगर निगम के पूर्व आयुक्त मनीष सिंह के परिश्रम का फल है| सभी को बधाई|

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इंदौर कैसे बना नंबर- 1
1- सड़को और फुटपाथ पर फैला कचरा था इंदौर की सबसे बड़ी मुसीबत का कारण, ऐसा नहीं था की शहर में कचरा पेटी नहीं थी| लेकिन कचरा पेटी भी कचरा सफाई की जगह और गंदगी बढ़ाने का कारण बन गयी थी|
2- सडकों पर आवारा पशु भी सफाई व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे थे और ट्रैफिक को भी। साफ़ सफाई को लेकर लोगों का माइंड सेट बदलना भी आसान नहीं था।
3- इन सब से निपटने के लिए नगर- निगम ने नयी स्ट्रैटजी से काम किया| और सीधे सोर्स से कचरा उठाने की योजना बनाई।
4- बड़ी कचरा पेटी को हटा कर कचरा उठाने के लिए 200 नयी छोटी गाड़ी लगवाई| ये गाड़ियां अब हर घर पर दस्तक देकर वहां से कचरा उठा लेती हैं। घरों के बाद इन गाड़ियों को बाजारों से कचरा उठाने की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा निगम ने गीला और सूखा कचना घरों से ही अलग-अलग करने को कहा। इसका असर ये हुआ कि खाद में परिवर्तित होने वाले कचरे को सीधे खाद बनाने वाले प्लांट तक पहुंचा दिया जाता है।
5- लोगों के माइंड सेट को बदलने के लिए कैंपेन चलाया गया। पोस्टर्स, होर्डिंग लगाए गए| सडकों पर घूम रहे आवारा जानवरों को पकड़कर शहर के बाहर गौशालाओं को या फिर जरूरतमंद लोगों को दे दिया गया।गंदी सडकों की सफाई के लिए रात में सफाई अभियान शुरू किया गया। साल भर में इसका असर नजर आने लगा, जिन सडकों पर कचरा बिखरा रहता था अब वो साफ़ सुथरी हो गई हैं।