प्रश्न ज्योतिष कितना प्रासंगिक ?

ज्योतिर्विद – संजय मिश्रा

वैदिक काल से ही हमारे देश भारतवर्ष में विद्या का विस्तार बृहद स्वरूप में पहुंच चुका था ।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र इसका एक महत्वपूर्ण अंग है । ज्योतिष को नारद संहिता में ऋषिवर ने वेदों का नेत्र की संज्ञा से अलंकृत किया है । भारतीय ज्योतिष के प्रमुख त्रिस्कन्ध हैं ।
सिद्धांत, संहिता, होरा । सिद्धांत ज्योतिष का गणित पक्ष है , संहिता ज्योतिष का समूह पर लगने वाला ज्योतिष जैसे मुहूर्त , वास्तु, प्रश्न शास्त्र , मेदनीय ज्योतिष , शकुन शास्त्र इत्यादि है । होरा ज्योतिष का जातक खंड या फलित ज्योतिष है । इसमें जातक का प्रारब्ध यानी इस जन्म का भविष्य उसकी कुंडली मे स्थिति नवग्रहों के विभिन्न भावों में होने से बने योगों के फल से जाना जा सकता है ।
परंतु अक्सर देखा गया है कि बहुत से लोगों के पास उनकी कुंडली नही होती है या सही जन्म समय का ज्ञान नही होता है , फलस्वरूप बिना जन्मपत्र के उन्हें ज्योतिष का लाभ नही प्राप्त हो पाता है ।ऐसी ही परिस्थितियों के लिए हमारे विद्धान ज्योतिष मनीषियों ने प्रश्न ज्योतिष के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया ।

  प्रश्न ज्योतिष कितना प्रासंगिक ?

प्रश्न ज्योतिष में जन्म पत्र के बिना ही प्रक्षक के गंभीर प्रश्नों का समाधान किया जाता है । इसमें जिस काल मे प्रश्नकर्ता प्रश्न करता है उस समय की ग्रह स्थिति से आकलन कर के दैवज्ञ उन समस्यायों का समाधान करता है ।
वराहमिहिर के पुत्र पृथुएसस ने शतपंचासीका नामक 56 श्लोक का महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा जो आज भी प्रश्न ज्योतिष का सबसे प्रासंगिक ग्रंथ है ।
इन ग्रंथो के विस्तृत अध्ययन से विविध प्रश्नों के उत्तर दिए जा सकते हैं । जैसे कि कोई व्यक्ति गायब हो गया है तो उसके कुशल के बारे में , वह जीवित है या नही , बंधन में है या स्वेच्छा से गया , कब तक लौटेगा यह सब बताया जा सकता है ।कोई बीमार है और अस्पताल में है उसके बारे में भी बताया जा सकता है । डॉक्टर कैसा है , बीमारी ठीक होगी या नही , दवा से लाभ होगा या नही , मरीज कैसा है इत्यादि ।
मैं अपने जीवन से एक उदाहरण देता हूँ ।मेरी माताजी 2014 में बहुत बीमार पड़ी, उनको यूरीन में गंभीर इन्फेक्शन था ।और 5 साल तक बहुत परेशान किया । सारे डॉक्टरों को दिखाया परंतु हर 2 महीने में दोबारा हो जाता था , फिर जांच करके एंटीबायोटिक दी जाती थी और फिर आराम मिलता था ।
कभी कभी उनको बहुत तेज ज्वर आ जाता था और जाँच रिपोर्ट आने में 72 घंटे लग जाते थे , तब तक के लिए कौन सी एंटीबायोटिक दी जाए यह निर्णय करना कठिन होता था । यदि दवा न दी जाए तो 72 घंटे में हालत गंभीर हो जाती थी । ऐसे में मैं प्रश्न लग्न का सहारा लेकर बहुत लाभान्वित रहा और माँ को बहुत कष्टों से बचा पाया।प्रश्न लग्न में चतुर्थ भाव से औषिधि को देखा जाता है । यदि चतुर्थ में ग्रहों का शुभ प्रभाव है तो दवा बिल्कुल ठीक है और शीघ्र ही लाभ मिलेगा , यदि चतुर्थ भाव मे पाप प्रभाव है तो औषिधि हानि कारक है । यदि चतुर्थ पर मिश्र प्रभाव है तो मिश्रफल प्राप्त होगा । इस प्रकार प्रश्न ज्योतिष से मुझे अपनी माँ के स्वास्थ्य रक्षा में बहुत सहयोग प्राप्त हुआ । प्रश्न ज्योतिष के विभिन्न आयाम है ।एक बुद्धिमान जतीतिषी जनकल्याण के लिए इनका उत्तम प्रयोग कर सकता है ।
भारतीय संस्कृति और ज्योतिष को शत शत नमन ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *