
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत बस स्टैंड पर मंगलवार को दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है. टेंट कारोबारी पिता-पुत्र की हत्या करने आए मुख्य हमलावर और बड़ौत कोतवाली के घोषित हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई है. वारदात के वक्त कारोबारी परिवार को निशाना बनाने के बाद आक्रोशित भीड़ और स्थानीय लोगों ने हमलावरों को घेर लिया था, जिसमें वरुण लुहारी गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसे इलाज के लिए मेरठ हायर सेंटर रेफर किया गया था, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया. इस खूनी संघर्ष में अब तक कुल तीन मौतें हो चुकी हैं.
यह सनसनीखेज वारदात बड़ौत कोतवाली क्षेत्र की मुख्य पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर हुई, जिसने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मंगलवार को हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी अपने साथियों के साथ हथियारों से लैस होकर ‘आर्य टेंट हाउस’ में घुस गया. उसने दुकान के भीतर बैठे कारोबारी परिवार पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं.
इस हमले में टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल (55) और उनके बेटे विकास अग्रवाल (30) को कई गोलियां लगीं, जिससे दोनों लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े. बाजार के बीचों-बीच दिनदहाड़े हुई इस फायरिंग से पूरे इलाके में भगदड़ मच गई. लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और देखते ही देखते बाजार की सभी दुकानें बंद हो गईं. कुछ ही मिनटों में पूरा मुख्य बाजार किसी युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया.
अस्पताल ले जाते समय पिता-पुत्र ने तोड़ा दम
वारदात के तुरंत बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, डॉक्टरों ने सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल को मृत घोषित कर दिया. दूसरी तरफ, भीड़ के गुस्से का शिकार हुए गंभीर रूप से घायल हमलावर वरुण लुहारी को मेरठ के हायर सेंटर भेजा गया था, लेकिन देर रात उसकी भी मौत हो गई. इस वारदात में दो अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है.
2015 की रंजिश बनी इस खूनी खेल की वजह
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच करीब 10 साल पुरानी रंजिश चली आ रही थी. साल 2015 में भी दिल्ली बस स्टैंड स्थित न्यू आर्य टेंट हाउस पर इसी तरह की भयंकर फायरिंग हुई थी. उस वक्त हुई गोलीबारी में वरुण लुहारी के भाई कपिल उर्फ पिंटू (पुत्र बाबूराम) की मौत हो गई थी. उसी हत्या के बाद से दोनों परिवारों के बीच बदले की आग सुलग रही थी. पुलिस का मानना है कि पुरानी दुश्मनी और भाई की मौत का बदला लेने की सनक में ही वरुण ने इस खूनी वारदात को अंजाम दिया.
गैंगस्टर एक्ट में कुर्क हुई थी संपत्ति, देहरादून में छिपा था वरुण
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया वरुण लुहारी बड़ौत कोतवाली का एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था. उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और मारपीट समेत करीब 19 गंभीर मुकदमे दर्ज थे. अपराध के जरिए कमाई गई उसकी संपत्ति को साल 2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर लिया गया था. पुलिस की सख्ती के बाद उसका परिवार देहरादून शिफ्ट हो गया था. बताया जा रहा है कि वरुण मंगलवार को बागपत में एक पुराने मुकदमे की तारीख पर पेश होने आया था और कोर्ट से निकलने के बाद उसने इस हत्याकांड को अंजाम दे डाला.
पिता बाबूराम गिरफ्तार, फरार आरोपियों के लिए 10 टीमें गठित
मृतक कारोबारी परिवार के परिजनों की तहरीर पर बड़ौत कोतवाली में हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य नामजद आरोपी बाबूराम (पुत्र उमराव सिंह) को गिरफ्तार कर लिया है. बागपत के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सूरज राय ने बताया कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच के लिए 10 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है. फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
व्यापारियों में भारी रोष, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
चौकी के इतने करीब और मुख्य बाजार में हुई इस दुस्साहसिक वारदात के बाद स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है. व्यापार मंडल का कहना है कि अगर पुलिस हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखती, तो इस दर्दनाक घटना को रोका जा सकता था. फिलहाल, तनाव को देखते हुए पूरे बड़ौत बाजार और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.





